NAPS यानी नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम - पूरी बात समझिए आसान भाषा में

पिछले हफ्ते मेरे एक जानने वाले का बेटा, जो अभी-अभी ITI पास करके निकला था, पूछ रहा था कि "भैया, डिग्री तो है नहीं, नौकरी कैसे मिलेगी, प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस कहाँ से लाऊं?" तब मैंने उसे यही स्कीम बताई थी - NAPS। और सच कहूं तो यह स्कीम उन लाखों युवाओं के लिए बनी ही इसीलिए है, जिनके पास हुनर तो है लेकिन इंडस्ट्री का असली अनुभव नहीं। आज इसी स्कीम की पूरी जानकारी आपके साथ शेयर कर रहा हूं - बिना किसी जटिल सरकारी भाषा के, बिल्कुल सीधी और आसान हिंदी में।

NAPS यानी नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम की पूरी जानकारी, पात्रता, लाभ, स्टाइपेंड और आवेदन प्रक्रिया

NAPS आखिर है क्या चीज़?

National Apprenticeship Promotion Scheme, यानी संक्षेप में NAPS, भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की एक योजना है। इसे साल 2016 में शुरू किया गया था और मकसद बड़ा सीधा-सा था - देश के युवाओं को कंपनियों में जाकर काम सीखने का मौका मिले, और साथ ही उन्हें इसके बदले कुछ पैसा भी मिले, ताकि ट्रेनिंग के दौरान वे अपने खर्चे भी उठा सकें।

आसान शब्दों में कहूं तो यह "सीखो और कमाओ" वाला मॉडल है। आप किसी कंपनी में अप्रेंटिस के तौर पर जुड़ते हैं, वहां काम सीखते हैं, और उसके बदले हर महीने एक तय रकम स्टाइपेंड के रूप में मिलती है। इस स्टाइपेंड का एक हिस्सा सीधे सरकार अपनी जेब से देती है, ताकि कंपनियों पर पूरा बोझ न पड़े और वे ज्यादा से ज्यादा युवाओं को मौका दें।

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इस योजना के पीछे सोच क्या थी?

अक्सर देखा जाता है कि पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद भी बच्चों को असली काम का तजुर्बा नहीं होता। कंपनियां फ्रेशर को नौकरी देने से पहले अनुभव मांगती हैं, और अनुभव मिलता कहां से है - यही पेच फंस जाता है। NAPS इसी गैप को भरने की कोशिश करती है। इसका मकसद है:

  • छोटी उम्र से ही युवाओं को इंडस्ट्री के माहौल से जोड़ना
  • कंपनियों को कुशल कामगार तैयार करने में मदद करना ताकि उन्हें बाहर से ट्रेंड लोग खोजने में कम मशक्कत करनी पड़े
  • अप्रेंटिसशिप को इतना आसान और फायदेमंद बनाना कि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां आगे आकर युवाओं को जोड़ें
  • ट्रेनिंग पूरी होने के बाद स्थायी रोजगार के दरवाजे खोलना

स्टाइपेंड और सरकार का योगदान कैसे काम करता है

यहीं पर असली खेल है और यही वो हिस्सा है जो ज्यादातर लोगों को कन्फ्यूज करता है। जब आप किसी कंपनी में अप्रेंटिस बनते हैं, तो आपकी सैलरी यानी स्टाइपेंड कंपनी और सरकार मिलकर देते हैं। सरकार की तरफ से स्टाइपेंड का एक हिस्सा सीधे आपके बैंक खाते में DBT यानी Direct Benefit Transfer के जरिए भेजा जाता है, बाकी हिस्सा कंपनी वहन करती है। यह रकम आपकी ट्रेड, अनुभव और ट्रेनिंग के साल के हिसाब से घटती-बढ़ती रहती है - इसलिए पक्के आंकड़े के लिए हमेशा अपने अपॉइंटमेंट लेटर और आधिकारिक पोर्टल को ही आखिरी सच मानिए, क्योंकि यह रकम समय-समय पर संशोधित होती रहती है।

एक बात और, बेसिक ट्रेनिंग की जो लागत होती है, उसमें भी सरकार कुछ हद तक मदद करती है, जिससे कंपनियों को अपने अप्रेंटिस को बेहतर तरीके से ट्रेन करने में आसानी होती है।

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कौन-कौन इस स्कीम के लिए योग्य है

अब बात करते हैं कि आखिर कौन इसमें अप्लाई कर सकता है। इसकी शर्तें बहुत जटिल नहीं हैं:

  • उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए
  • न्यूनतम उम्र आमतौर पर 14 वर्ष रखी गई है (कुछ खतरनाक ट्रेड्स में यह 18 वर्ष है), और अधिकतम उम्र की सीमा तय ट्रेड और राज्य के नियमों पर निर्भर करती है
  • शैक्षणिक योग्यता ट्रेड के हिसाब से बदलती है - किसी के लिए 5वीं-8वीं पास काफी है, तो किसी ट्रेड के लिए ITI या डिप्लोमा जरूरी हो सकता है
  • उम्मीदवार का आधार कार्ड बना होना जरूरी है, क्योंकि पूरी प्रक्रिया आधार आधारित ई-केवाईसी से जुड़ी है

सबसे अच्छी बात यह है कि यह स्कीम सिर्फ किसी खास पढ़ाई-लिखाई वाले वर्ग के लिए नहीं है। स्कूल छोड़ चुके, ITI पास, डिप्लोमा होल्डर और यहां तक कि ग्रेजुएट भी अलग-अलग ट्रेड में अप्रेंटिसशिप के लिए योग्य हो सकते हैं।

अप्लाई करने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी

आवेदन से पहले ये चीजें अपने पास तैयार रखिए, ताकि बाद में भागदौड़ न करनी पड़े:

  • आधार कार्ड
  • शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्र और मार्कशीट
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर, जो आधार से लिंक हो (क्योंकि OTP वेरिफिकेशन होता है)
  • बैंक खाते की जानकारी, ताकि स्टाइपेंड सीधे खाते में आ सके
  • अगर पहले किसी ट्रेनिंग या कोर्स में हिस्सा लिया है, तो उसका प्रमाण पत्र भी काम आ सकता है

रजिस्ट्रेशन कैसे करें, स्टेप बाय स्टेप

अब सबसे जरूरी हिस्सा - अप्लाई कैसे करना है। घबराइए मत, यह उतना मुश्किल नहीं जितना लगता है।

पहला कदम: सबसे पहले Apprenticeship India के आधिकारिक पोर्टल पर जाइए। ध्यान रखिए, हमेशा सरकारी वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें, किसी थर्ड-पार्टी लिंक पर भरोसा न करें।

दूसरा कदम: होमपेज पर आपको Register का विकल्प दिखेगा। वहां Candidate वाला ऑप्शन चुनें, क्योंकि आप अप्रेंटिस के तौर पर रजिस्टर कर रहे हैं, न कि कंपनी की तरफ से।

तीसरा कदम: अब एक फॉर्म खुलेगा जिसमें आपकी निजी जानकारी, शैक्षणिक विवरण और स्किल से जुड़ी डिटेल मांगी जाएगी। इसे बहुत ध्यान से भरें, क्योंकि छोटी सी गलती भी बाद में परेशानी बन सकती है।

चौथा कदम: आधार नंबर डालकर ई-केवाईसी पूरी करें और मोबाइल पर आए OTP से वेरिफिकेशन करें।

पांचवां कदम: फॉर्म सबमिट करने के बाद आपकी प्रोफाइल पोर्टल पर लाइव हो जाती है, और अब आप वहां मौजूद कंपनियों की अप्रेंटिसशिप वैकेंसी देखकर अप्लाई कर सकते हैं।

छठा कदम: जिस कंपनी में आपका सिलेक्शन होता है, वहां से आपको ऑफर मिलता है और उसके बाद ट्रेनिंग शुरू हो जाती है।

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NATS और NAPS में फर्क समझ लीजिए

कई लोग NAPS और NATS को एक ही समझ बैठते हैं, जबकि दोनों अलग हैं। NATS यानी National Apprenticeship Training Scheme मुख्य रूप से ग्रेजुएट, डिप्लोमा होल्डर और टेक्निकल बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए है और इसे शिक्षा मंत्रालय संभालता है। वहीं NAPS का दायरा ज्यादा बड़ा है, इसमें आईटीआई पास और स्कूल छोड़ चुके युवा भी आ सकते हैं, और इसे कौशल विकास मंत्रालय चलाता है। तो अगली बार कोई इन दोनों को लेकर कन्फ्यूज करे, तो अब आप उसे साफ-साफ फर्क बता सकते हैं।

किन बातों का खास ध्यान रखें

  • आवेदन करने से पहले हमेशा आधिकारिक पोर्टल के अलावा किसी और वेबसाइट पर भरोसा न करें, क्योंकि सरकारी योजनाओं के नाम पर फ्रॉड बहुत होते हैं
  • कोई भी एजेंट या बिचौलिया पैसे मांगे तो सतर्क हो जाइए, यह रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त है
  • अपनी सारी जानकारी सही और अद्यतन रखें, गलत जानकारी देने पर आवेदन रद्द भी हो सकता है
  • ट्रेनिंग के दौरान मिलने वाला अनुभव सर्टिफिकेट भविष्य में नौकरी पाने में बहुत काम आता है, इसे संभाल कर रखें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह स्कीम पूरी तरह मुफ्त है? हां, रजिस्ट्रेशन के लिए किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती। अगर कोई पैसे मांगे तो समझ लीजिए कि वह गलत है।

क्या 12वीं पास छात्र भी अप्लाई कर सकते हैं? बिल्कुल, अलग-अलग ट्रेड के हिसाब से 12वीं पास, ITI पास और डिप्लोमा होल्डर सभी के लिए विकल्प मौजूद हैं।

ट्रेनिंग खत्म होने के बाद क्या पक्की नौकरी मिल जाएगी? यह गारंटी नहीं है, लेकिन कई कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करने वाले अप्रेंटिस को स्थायी रूप से भी रख लेती हैं। कम से कम अनुभव और सर्टिफिकेट तो पक्का मिलता है, जो भविष्य में रिज्यूमे में जोड़ने पर आपकी दावेदारी को और मजबूत बनाता है।

स्टाइपेंड कब तक और कैसे मिलता है? यह हर महीने आपके बैंक खाते में सीधा जमा होता है, और इसकी रकम आपकी ट्रेड व अनुभव के हिसाब से तय होती है।

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और अब यही कहना चाहूंगा कि अगर आप या आपके घर में कोई ऐसा युवा है जो पढ़ाई तो पूरी कर चुका है पर असली काम का अनुभव नहीं जुटा पा रहा, तो NAPS एक शानदार शुरुआत हो सकती है। न सिर्फ आपको काम सीखने को मिलेगा, बल्कि हाथ में थोड़े पैसे भी आएंगे और भविष्य के लिए एक भरोसेमंद अनुभव प्रमाण पत्र भी। सरकारी स्कीमों की सबसे अच्छी बात यही है कि ये मौका सबको बराबर देती हैं, बस जानकारी सही समय पर मिलनी चाहिए।

अगर आपके मन में इस स्कीम को लेकर कोई और सवाल है, तो नीचे कमेंट में जरूर पूछिए। कोशिश करूंगा कि जल्द से जल्द जवाब दूं।

नोट:- इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न सार्वजनिक और सरकारी स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। योजना से जुड़े नियम, पात्रता और स्टाइपेंड राशि समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले कृपया संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ताजा जानकारी जरूर जांच लें। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है, इसे किसी भी तरह की आधिकारिक सलाह न समझें।

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