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फ्री सरकारी स्किल ट्रेनिंग के बाद जॉब कैसे मिलती है? पूरी प्रक्रिया

फ्री सरकारी स्किल ट्रेनिंग के बाद जॉब कैसे मिलती है? पूरी प्रक्रिया

मेरा एक दोस्त है। दिल्ली के एक छोटे से मोहल्ले में रहता है। उसके पापा क्लर्क थे और मम्मी घर संभालती थीं। उसने बी.ए. किया, जैसे हम में से ज्यादातर लोग करते हैं, इस उम्मीद में कि आगे कुछ अच्छा होगा। लेकिन डिग्री के बाद उसे एक प्राइवेट कंपनी में सिर्फ 12,000 रुपये महीने की जॉब मिली। हर महीने वही कहानी - किराया देना है, बिजली का बिल देना है, राशन लाना है और महीने के आखिर में जेब फिर खाली।

वो अक्सर रात को छत पर बैठकर सोचता था - “क्या यही जिंदगी है? क्या मैं हमेशा ऐसे ही संघर्ष करता रहूंगा?” उम्र 28 साल हो गई थी, घर में शादी की बात शुरू हो गई थी, लेकिन खुद की हालत देखकर उसे डर लगता था। जिम्मेदारियां बढ़ रही थीं, लेकिन कमाई नहीं।

फिर एक दिन मेरे दोस्त के पड़ोस के एक अंकल ने उसे कहा - “बेटा, सरकार फ्री में स्किल ट्रेनिंग दे रही है, PMKVY में नाम लिखवा ले।” उसने पहले इसे मजाक समझकर टाल दिया। उसे लगा, “फ्री में कुछ अच्छा थोड़ी मिलता है।” लेकिन उसी रात जब घर में बात हुई, तो उसकी मम्मी ने धीरे से कहा -“एक बार कोशिश करके देख ले, क्या पता कुछ बदल जाए।”

उसने बिना ज्यादा उम्मीद के फॉर्म भर दिया। शुरुआत में सब नया और अजीब लगा, लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा कि वो सच में कुछ सीख रहा है। तीन महीने बाद उसने इलेक्ट्रिशियन की ट्रेनिंग पूरी कर ली।

आज वही दोस्त 28,000 रुपये महीने कमा रहा है। एक कंपनी में काम करता है, कंपनी की तरफ से गाड़ी भी मिलती है। सबसे बड़ी बात - अब उसके चेहरे पर आत्मविश्वास है। अब वो रात को छत पर बैठकर परेशान नहीं होता, बल्कि आगे के सपने देखता है।

आज मैं आपको सिर्फ उसकी कहानी नहीं बता रहा, बल्कि वो पूरी सच्ची प्रक्रिया बताने वाला हूँ, जो लाखों मिडिल क्लास युवाओं के मन में चलती है - “क्या फ्री सरकारी स्किल ट्रेनिंग से सच में जॉब मिल सकती है?”

यहाँ आपको कोई झूठे वादे या नकली मोटिवेशन नहीं मिलेगा। सिर्फ असली बातें, रियल अनुभव, और वो स्टेप्स जो सच में काम करते हैं।

तो चलिए शुरू करते हैं और इसे ध्यान से पढ़िए।

फ्री सरकारी स्किल ट्रेनिंग के बाद जॉब कैसे मिलती है? पूरी प्लेसमेंट प्रक्रिया

ये सवाल लगभग हर उस लड़के-लड़की के मन में आता है, जो ट्रेनिंग में एडमिशन लेता है। सच बताऊँ, मेरे दोस्त के मन में भी यही डर था। उसे लगता था - “ठीक है ट्रेनिंग तो हो जाएगी, लेकिन जॉब कैसे मिलेगी? क्या फिर से वही बेरोजगारी?” अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो ध्यान से पढ़िए। क्योंकि असली खेल ट्रेनिंग के बाद शुरू होता है।

1. ट्रेनिंग सेंटर की प्लेसमेंट हेल्प – यहीं से शुरुआत होती है

ट्रेनिंग के आखिरी महीने में ही सेंटर वाले प्लेसमेंट की बात करना शुरू कर देते हैं। मेरे दोस्त के सेंटर में भी एक दिन अचानक बताया गया - “अगले हफ्ते 3 कंपनियां इंटरव्यू लेने आएंगी।”

उसे पहली बार लगा कि शायद सच में कुछ हो सकता है। ज्यादातर ट्रेनिंग सेंटर्स की कंपनियों से पार्टनरशिप होती है। कुछ में पहले इंटर्नशिप मिलती है, और कई बार सीधे जॉब ऑफर भी मिल जाता है। DDU-GKY जैसी योजनाओं में तो प्लेसमेंट पर खास फोकस होता है। ट्रेनिंग सेंटर खुद कोशिश करता है कि ज्यादातर स्टूडेंट्स को जॉब मिल जाए।

2. कौशल मेला (Kaushal Mela) और जॉब मेले - जहां मौके खुद चलकर आते हैं

मेरे दोस्त ने पहली बार “कौशल मेला” का नाम ट्रेनिंग के दौरान सुना था। उसे लगा था ये भी कोई फॉर्मेलिटी होगी। लेकिन जब वो वहां गया, तो हैरान रह गया। एक ही जगह 50-100 कंपनियों के स्टॉल लगे थे। हर कंपनी नए लोगों की तलाश में थी। वो अपना छोटा सा रिज्यूमे लेकर गया, थोड़ा nervous था, लेकिन जैसे-जैसे इंटरव्यू देता गया, उसका confidence बढ़ता गया। उस दिन उसे समझ आया -मौके बाहर नहीं, हमारे आसपास ही होते हैं।

3. Skill India Digital Hub - ऑनलाइन भी जॉब के मौके

ट्रेनिंग के बाद सेंटर वाले बोले - “अपनी प्रोफाइल Skill India Digital Hub पर अपडेट करो।” उसने अपना सर्टिफिकेट अपलोड किया, स्किल्स लिखीं, और जॉब अलर्ट ऑन कर दिया। कुछ ही दिनों में मोबाइल पर जॉब के मैसेज आने लगे। पहली बार उसे लगा कि अब वो सिर्फ बेरोजगार ग्रेजुएट नहीं, बल्कि एक skilled candidate है।

4. खुद अप्लाई करना – यही सबसे जरूरी स्टेप है

सच कहूँ, सिर्फ सेंटर के भरोसे बैठना काफी नहीं होता। मेरे दोस्त ने खुद भी कोशिश की। उसने Naukri.com, Indeed और Apna App पर प्रोफाइल बनाई। शुरू में रिजेक्शन भी मिला। पहला इंटरव्यू क्लियर नहीं हुआ। उस दिन वो थोड़ा निराश हुआ। लेकिन उसने हार नहीं मानी। दूसरे इंटरव्यू में उसने confidence से जवाब दिए। और उसी दिन उसे सिलेक्शन का कॉल आया। उस दिन उसकी आवाज में जो खुशी थी, वो आज भी याद है।

रिज्यूमे कैसे बनाएं जो इंटरव्यू में सच में काम करे?

पहले उसे लगता था कि रिज्यूमे बनाना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन सच में, एक सिंपल 1 पेज का रिज्यूमे ही काफी होता है। उसने अपने रिज्यूमे में ये चीजें लिखीं:

• अपना नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल PMKVY ट्रेनिंग की पूरी डिटेल
• कौन-कौन सी स्किल्स सीखी - जैसे वायरिंग, टूल्स का इस्तेमाल
• ट्रेनिंग के दौरान किया गया प्रैक्टिकल काम

उसने एक लाइन और लिखी -
“ट्रेनिंग के दौरान 50+ घरों की वायरिंग की प्रैक्टिस की।”

इंटरव्यू में जब HR ने ये पढ़ा, तो उन्होंने उसी पर सवाल पूछे। और वहीं से इंटरव्यू का माहौल बदल गया। अब वो सिर्फ एक फ्रेशर नहीं, बल्कि एक trained candidate था।

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इंटरव्यू की तैयारी – वो 5 बातें जो सच में फर्क डालती हैं

मेरे दोस्त ने अपने अनुभव से ये सीखा:

1. कपड़े साधारण लेकिन साफ और फॉर्मल हों
पहला impression बहुत मायने रखता है।

2. जवाब देते समय अपने ट्रेनिंग अनुभव का जिक्र करें
जैसे - “मैंने ट्रेनिंग में ये काम practically किया है...”

3. सिर्फ सैलरी पर फोकस न करें
एक बार उसने पूछा - “सर, यहां सीखने और आगे बढ़ने का क्या मौका मिलेगा?”
ये सुनकर इंटरव्यूअर impressed हो गया।

4. confidence सबसे जरूरी है
भले सब कुछ न आता हो, लेकिन आत्मविश्वास होना चाहिए।

5. इंटरव्यू के अंत में खुद भी सवाल पूछें
इससे लगता है कि आप सच में interested हैं।

रियल लाइफ स्टोरीज - इन्हें पढ़कर लगेगा “हां, मैं भी कर सकता हूं”

जब मेरा दोस्त ट्रेनिंग कर रहा था, तब उसे लगता था कि शायद ये सब उसके लिए काम नहीं करेगा। लेकिन फिर उसने अपने जैसे ही कुछ लोगों को देखा, जिनकी जिंदगी सच में बदल चुकी थी। उनकी कहानियां सुनकर पहली बार उसे लगा - “अगर ये कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं?”

स्टोरी 1: राहुल की - एक छोटे गांव से बड़े शहर तक का सफर

राहुल बिहार के एक छोटे से गांव का रहने वाला है। उम्र सिर्फ 22 साल। 12वीं के बाद वो घर पर ही रहता था, कभी खेती में हाथ बंटा देता, कभी दोस्तों के साथ समय निकाल देता। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि आगे पढ़ाई कर सके। एक दिन गांव में ही किसी ने उसे PMKVY ट्रेनिंग के बारे में बताया। घरवालों ने पहले मना किया - “इससे क्या होगा?” लेकिन राहुल ने किसी तरह उन्हें मना लिया।

उसने प्लंबर का कोर्स किया। शुरुआत में उसे पाइप के नाम तक नहीं पता थे। लेकिन धीरे-धीरे सब सीख गया। ट्रेनिंग के बाद DDU-GKY के जरिए उसे मुंबई भेजा गया। पहले 3 महीने इंटर्नशिप मिली - 10,000 रुपये। उसके लिए ये भी बहुत बड़ी बात थी। फिर उसे परमानेंट जॉब मिल गई - 22,000 रुपये और ओवरटाइम अलग। आज वो हर महीने 15,000 रुपये घर भेजता है। एक दिन उसने मुस्कुराते हुए कहा - “भाई, पहले घर वाले ट्रेनिंग के खिलाफ थे और अब पूरे गांव में सबको मेरी मिसाल देते हैं।”

स्टोरी 2: प्रिया की - घर की बहू से आत्मनिर्भर महिला बनने तक

प्रिया दिल्ली में रहती है। शादी के बाद उसकी जिंदगी घर और परिवार तक ही सीमित हो गई थी। उसका सपना था कि वो कुछ अपना करे, लेकिन मौका नहीं मिल रहा था। एक दिन उसकी सहेली ने उसे DDU-GKY ट्रेनिंग के बारे में बताया। उसने ब्यूटीशियन कोर्स जॉइन किया। शुरुआत में उसे डर लगता था - “क्या मैं कर पाऊंगी?” लेकिन ट्रेनिंग के दौरान ही उसे एक लोकल सैलून में पार्ट-टाइम काम मिल गया। वहां से उसका confidence बढ़ा। कुछ महीनों बाद उसने अपने घर के पास ही एक छोटा सा सैलून खोल लिया। आज वो महीने के 25-30 हजार रुपये कमा रही है। अपने बच्चे की स्कूल फीस खुद भरती है। और सबसे बड़ी बात - अब उसे खुद पर गर्व होता है।

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स्टोरी 3: एक साधारण लड़के की कहानी – जो कभी 12,000 कमाता था

मेरे दोस्त की कहानी भी कुछ अलग नहीं थी। पहले 12,000 रुपये की जॉब, कोई ग्रोथ नहीं, कोई भविष्य साफ नहीं। लेकिन इलेक्ट्रिशियन ट्रेनिंग के बाद उसे 28,000 रुपये की जॉब मिली। कंपनी ने सिर्फ इसलिए प्रमोशन दिया क्योंकि उसके पास सरकारी सर्टिफिकेट था। उस दिन उसे पहली बार लगा - “मैं भी आगे बढ़ सकता हूं।”

स्टोरी 4: अमन की - ग्रेजुएट होने के बाद भी संघर्ष, लेकिन हार नहीं मानी

अमन ग्रेजुएट था, लेकिन जॉब सिर्फ कॉल सेंटर में मिली - 8,000 रुपये। रोज 9-10 घंटे काम, लेकिन कोई संतुष्टि नहीं। उसने Skill India के तहत रिटेल सेल्स कोर्स किया। ट्रेनिंग के बाद उसे Reliance Retail में जॉब मिली - 18,000 रुपये और इंसेंटिव अलग। उसने एक बार कहा था - “डिग्री से ज्यादा जरूरी स्किल होती है, ये अब समझ आया।”

चुनौतियां आती हैं, लेकिन रास्ते भी मिलते हैं

सच ये है कि हर किसी को तुरंत जॉब नहीं मिलती। मेरे दोस्त की क्लास में भी कुछ लोगों को तुरंत जॉब मिली, कुछ को थोड़ा इंतजार करना पड़ा।

• कई बार प्लेसमेंट रेट 40-50% ही होता है
• छोटे शहरों में मौके कम होते हैं, इसलिए कुछ लोगों को बड़े शहर जाना पड़ता है
• कई इंटरव्यू में रिजेक्शन भी मिलता है

लेकिन हर रिजेक्शन आपको बेहतर बनाता है।

मेरे दोस्त ने 2 इंटरव्यू दिए - पहला रिजेक्ट। लेकिन दूसरे में सिलेक्ट हो गया।

उसने एक बात कही थी -
“अगर मैं पहले रिजेक्शन के बाद रुक जाता, तो आज भी 12,000 पर ही होता।”

मेरा सीखा हुआ फॉर्मूला (जो सच में काम करता है)

ट्रेनिंग + सर्टिफिकेट + लगातार कोशिश + patience = एक अच्छी जॉब

या आसान शब्दों में:
ट्रेनिंग + 50 एप्लीकेशन + 10 इंटरव्यू = 1 अच्छी जॉब

कुछ जरूरी टिप्स -  जो ज्यादातर लोग नहीं बताते

• ट्रेनिंग के दौरान ही टीचर से पूछो - कौन-कौन सी कंपनियां हायर करती हैं
• अपने बैच के दोस्तों के साथ WhatsApp ग्रुप बनाओ
• YouTube पर अपने ट्रेड से जुड़े वीडियो देखते रहो
• 6 महीने बाद एडवांस सर्टिफिकेट ले सकते हो
• अगर जॉब नहीं करना चाहते, तो खुद का काम भी शुरू कर सकते हो

निष्कर्ष: अब आपकी बारी है

सच कहूं, ये सब पढ़कर आपको लग सकता है कि ये कहानियां खास लोगों की हैं। लेकिन ऐसा नहीं है।

ये सब साधारण लोग हैं - हमारी तरह और आपके जैसे।

फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने पहला कदम उठाया। अगर आप आज शुरुआत करते हैं, तो अगले 6 महीने में आपकी जिंदगी बदल सकती है अगर आप सच में जुनूनी है और अपनी सफलता को लेकर तत्पर है तो आप निश्चित तौर लगातार मेहनत और प्रयासरत रहते हुये अपनी जिन्दगी बदल सकते हो । आज ही Skill India वेबसाइट पर जाइए। अपना पिनकोड डालिए। एक कोर्स चुनिए। बस शुरुआत करिए। क्योंकि शुरुआत ही सबसे मुश्किल होती है।

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