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कौन-सी स्किल्स पार्ट-टाइम में सीखी जा सकती हैं फुल-टाइम जॉब के साथ?

कौन-सी स्किल्स पार्ट-टाइम में सीखी जा सकती हैं फुल-टाइम जॉब के साथ?

दोस्तों, मैं दिल्ली में रहता हूं और पिछले 8 साल से एक कंपनी में फुल-टाइम जॉब कर रहा हूं। मेरी सुबह 9 बजे ऑफिस से शुरू होती है और शाम 6 बजे खत्म होती है लेकिन सच कहूं तो असली थकान ऑफिस से नहीं, उस रोज़-रोज़ दोहराए जाने वाले रूटीन से होती है। कभी मेट्रो की भीड़, कभी ट्रैफिक में फंसी गाड़ियां, और फिर घर पहुंचते-पहुंचते इतना थक जाना कि अपने लिए आधा घंटा भी नहीं बचता।

कॉलेज के दिनों में सोचता था – “बस एक अच्छी नौकरी मिल जाए, फिर जिंदगी सेट।” लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, समझ आया कि सिर्फ नौकरी होना ही लाइफ सेट होना नहीं होता। सैलरी धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन खर्चे उससे कहीं तेज़ भागते हैं। कई बार महीने के आख़िरी हफ्ते में बैंक बैलेंस देखकर सच में चिंता होने लगती है । ऐसा लगता है जैसे मेहनत तो पूरी कर रहा हूं, पर आगे बढ़ने की रफ्तार बहुत धीमी है।

एक दिन ऑफिस के बाद चाय पर बैठे थे, तभी एक दोस्त ने casually बताया कि वो जॉब के साथ-साथ डिजिटल मार्केटिंग सीख रहा है और फ्रीलांसिंग से अतिरिक्त कमाई भी कर रहा है। पहले तो विश्वास नहीं हुआ। मन में सवाल आया - “जॉब के साथ ये सब कैसे मैनेज करता होगा?” लेकिन उसी दिन एक बात समझ आई - अगर कोई और कर सकता है, तो शायद मैं भी कर सकता हूं।

यहीं से सोच बदली। एहसास हुआ कि नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन खुद को रोकना भी जरूरी नहीं है। आज उसी आधार पर बात करने जा रहा हूं कि फुल-टाइम जॉब के साथ कौन-सी स्किल्स पार्ट-टाइम में सीखी जा सकती हैं -बि ना खुद को पूरी तरह थकाए।

अगर आप भी 9 से 6 की नौकरी के बाद कभी छत की तरफ देखते हुए सोचते हैं, “क्या यही जिंदगी है?”, तो ये लेख आपके लिए है।

क्यों पार्ट-टाइम में स्किल्स सीखना जरूरी है?

दोस्तों, आज की सच्चाई ये है कि सिर्फ एक जॉब पर पूरी तरह निर्भर रहना थोड़ा रिस्की हो गया है। कोरोना के समय में हमने देखा ही था - कितने लोगों की नौकरियां अचानक चली गईं। उस समय पहली बार एहसास हुआ कि “सेफ” समझी जाने वाली नौकरी भी हमेशा गारंटी नहीं होती।

ऑफिस में भी अक्सर यही माहौल दिखता है - लोग सालों से प्रमोशन का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन हर बार बजट, पॉलिसी या कंपनी की स्ट्रेटेजी का बहाना सामने आ जाता है। धीरे-धीरे समझ में आता है कि अगर खुद की ग्रोथ खुद नहीं संभाली, तो कोई और नहीं संभालेगा।

पार्ट-टाइम में कोई नई स्किल सीखना सिर्फ एक्स्ट्रा इनकम का तरीका नहीं है, ये एक तरह की पर्सनल सिक्योरिटी है। ये आपको यह भरोसा देता है कि अगर कभी नौकरी में कुछ गड़बड़ हो भी जाए, तो आपके पास एक दूसरा रास्ता मौजूद है।

मुझे अपनी एक कलीग याद आती है। वो अकाउंटेंट थी, बिल्कुल नॉर्मल 9 से 6 वाली जॉब। लेकिन उसने धीरे-धीरे पार्ट-टाइम में ग्राफिक डिजाइन सीखना शुरू किया। शुरुआत में उसे भी टाइम मैनेजमेंट बहुत मुश्किल लगता था। वो अक्सर कहती थी कि ऑफिस के बाद तो बस आराम करने का मन करता है। लेकिन उसने तय किया कि वीकेंड पर 2-3 घंटे सिर्फ सीखने के लिए देगी। कुछ ऑनलाइन कोर्स किए, यूट्यूब से सीखा, और छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स पर प्रैक्टिस की। आज वही स्किल उसे हर महीने 20-30 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई दे रही है। फर्क बस इतना था कि उसने शुरू किया।

अगर आप भी सोच रहे हैं कि जॉब के साथ कुछ नया सीखना संभव है या नहीं - तो जवाब है, हां, बिल्कुल संभव है। बस शुरुआत छोटी रखिए, लेकिन लगातार रखिए।

डिजिटल मार्केटिंग: सबसे आसान और डिमांड में रहने वाली स्किल

जब फुल-टाइम जॉब के साथ पार्ट-टाइम स्किल सीखने की बात आती है, तो डिजिटल मार्केटिंग सबसे प्रैक्टिकल ऑप्शन में से एक है। वजह साफ है - इसे घर बैठे सीखा जा सकता है, और फ्री रिसोर्सेज की कमी नहीं है। आज लगभग हर बिजनेस ऑनलाइन है, इसलिए इसकी जरूरत लगातार बनी रहने वाली है।

SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन)

SEO वो स्किल है जो किसी वेबसाइट या ब्लॉग को गूगल पर ऊपर लाने में मदद करती है। शुरुआत में यह थोड़ा टेक्निकल लग सकता है, लेकिन असल में यह लॉजिक और स्ट्रेटेजी का खेल है।

मान लीजिए आप ब्लॉग लिखते हैं या किसी बिजनेस की वेबसाइट संभालते हैं। अगर आपको सही कीवर्ड चुनना और कंटेंट ऑप्टिमाइज करना आ जाए, तो ट्रैफिक अपने-आप बढ़ने लगता है।

शुरुआत करने के लिए बहुत बड़े कोर्स की जरूरत नहीं होती। रोज शाम को सिर्फ 1 घंटा निकालकर कीवर्ड रिसर्च, ऑन-पेज SEO और बेसिक टूल्स समझे जा सकते हैं। कई लोग इसी स्किल से छोटे-छोटे फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स लेकर शुरुआत करते हैं। 2-3 महीने की लगातार प्रैक्टिस के बाद पहला क्लाइंट मिलना कोई बड़ी बात नहीं है।

अगर आप पहले से मार्केटिंग या कंटेंट से जुड़ी जॉब में हैं, तो SEO सीखना आपके प्रमोशन के चांस भी बढ़ा सकता है।

शुरुआत के लिए:

  • गूगल सर्च कंसोल
  • गूगल एनालिटिक्स
  • कीवर्ड रिसर्च के फ्री टूल्स

इनसे बेसिक्स समझिए, फिर धीरे-धीरे एडवांस सीखिए।

सोशल मीडिया मैनेजमेंट

हम सब रोज सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उसे प्रोफेशनली मैनेज करना एक अलग स्किल है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ब्रांड्स की ग्रोथ कराना आज एक बड़ी डिमांड बन चुका है।

एक जान-पहचान वाले स्कूल टीचर ने खाली समय में सोशल मीडिया मैनेजमेंट सीखना शुरू किया। पहले उन्होंने सिर्फ Canva से ग्राफिक्स बनाना सीखा। फिर पोस्ट शेड्यूलिंग और बेसिक कंटेंट प्लानिंग समझी। धीरे-धीरे लोकल दुकानों और छोटे बिजनेस का अकाउंट संभालना शुरू किया। आज वो महीने के करीब 10 हजार रुपये अतिरिक्त कमा लेते हैं - वो भी अपनी रेगुलर जॉब छोड़े बिना।

अगर आप सोचते हैं कि टाइम नहीं मिलेगा, तो एक छोटा-सा बदलाव कीजिए - रोज 30 मिनट सिर्फ स्क्रॉल करने के बजाय यह देखिए कि कौन-सी पोस्ट वायरल हो रही है और क्यों। यही एनालिसिस आपको इस फील्ड में आगे बढ़ाएगा।

कुछ फ्री टूल्स जैसे:

  • Buffer
  • Hootsuite

इनसे पोस्ट शेड्यूल करना आसान हो जाता है।

सबसे अच्छी बात ये है कि यह काम आप घर से, अपने टाइम के हिसाब से कर सकते हैं - इसलिए फुल-टाइम जॉब वालों के लिए ये काफी सूटेबल ऑप्शन है।

कंटेंट मार्केटिंग: धीरे-धीरे शुरू होने वाली लेकिन मजबूत स्किल

अक्सर लोग कहते हैं -“Content is King.” लेकिन असल में कंटेंट सिर्फ शब्द नहीं होता, ये आपकी सोच, आपका नजरिया और आपकी समझ को लोगों तक पहुंचाने का तरीका है। ब्लॉग लिखना, वीडियो बनाना, ईमेल न्यूज़लेटर भेजना - ये सब कंटेंट मार्केटिंग का हिस्सा हैं।

सबसे अच्छी बात ये है कि इसे आप अपनी स्पीड से सीख सकते हैं। रोज 30–45 मिनट भी काफी होते हैं।

एक जान-पहचान वाली बैंक में काम करती हैं। शुरू में उन्हें लगता था कि लिखना उनके बस की बात नहीं है, खासकर हिंदी में। लेकिन उन्होंने Medium और WordPress पर छोटे-छोटे आर्टिकल लिखकर प्रैक्टिस शुरू की। शुरुआत में व्यूज़ कम थे, कॉन्फिडेंस भी डगमगाया। लेकिन 3-4 महीने की लगातार मेहनत के बाद उन्हें पहला फ्रीलांस आर्टिकल मिला। आज वो महीने के लगभग 15,000 रुपये अतिरिक्त कमा लेती हैं।

अगर आप हिंदी में सहज हैं, तो आपके लिए तो और भी बड़ा मौका है। लोकल ऑडियंस तेजी से बढ़ रही है और अच्छे हिंदी कंटेंट की डिमांड काफी ज्यादा है।

यह भी पढ़े:- घर बैठे स्किल से पैसे कमाने के 7 रियलिस्टिकतरीके

कोडिंग और प्रोग्रामिंग: भविष्य में काम आने वाली स्किल

कोडिंग का नाम सुनते ही अक्सर लगता है कि ये बहुत मुश्किल और सिर्फ इंजीनियर्स के लिए है। लेकिन सच ये है कि आज इतने आसान प्लेटफॉर्म और कोर्स मौजूद हैं कि कोई भी बेसिक्स से शुरुआत कर सकता है।

पायथन प्रोग्रामिंग

अगर किसी एक भाषा से शुरुआत करनी हो, तो पायथन सबसे सरल मानी जाती है। डेटा एनालिसिस हो, ऑटोमेशन हो या छोटी स्क्रिप्ट - सब कुछ इसमें संभव है।

कई लोग जॉब के बाद रोज सिर्फ 40-45 मिनट देकर इसे सीखते हैं। एक बार ऑफिस में रोज एक रिपोर्ट मैन्युअली बनानी पड़ती थी। जब ऑटोमेशन सीखा, तो वही काम कुछ मिनटों में होने लगा। इससे सिर्फ समय नहीं बचता, बल्कि ऑफिस में आपकी वैल्यू भी बढ़ती है।

अगर आप फाइनेंस, डेटा या ऑपरेशंस से जुड़े हैं, तो पायथन सीखना आपके करियर के लिए गेम-चेंजर हो सकता है।

वेब डेवलपमेंट (HTML, CSS, JavaScript)

आज हर छोटे-बड़े बिजनेस को वेबसाइट चाहिए। HTML, CSS और JavaScript सीखकर आप बेसिक वेबसाइट बनाना शुरू कर सकते हैं।

एक दोस्त ने जॉब के साथ-साथ freeCodeCamp से सीखना शुरू किया। शुरुआत में सिर्फ अपने लिए एक पोर्टफोलियो वेबसाइट बनाई। फिर एक लोकल दुकान की साइट बनाई। धीरे-धीरे क्लाइंट्स मिलने लगे। आज वही स्किल उन्हें महीने के 20-25 हजार रुपये अतिरिक्त दिला रही है।

पार्ट-टाइम सीखने वालों के लिए सबसे अच्छा तरीका है -हर वीकेंड एक छोटा प्रोजेक्ट बनाना।

ऐप डेवलपमेंट बेसिक्स

अगर मोबाइल ऐप्स में रुचि है, तो Flutter या React Native से शुरुआत कर सकते हैं। शुरुआत में मुश्किल लगता है, लेकिन यूट्यूब और फ्री ट्यूटोरियल्स काफी मदद करते हैं।

कई टीचर्स और प्रोफेशनल्स ने पार्ट-टाइम में सीखकर छोटे एजुकेशन या लोकल सर्विस ऐप्स बनाए हैं। रोज सिर्फ 1 घंटा प्रैक्टिस भी लंबे समय में बड़ा फर्क डाल सकता है।

क्रिएटिव स्किल्स: सीखते-सीखते स्ट्रेस भी कम

क्रिएटिव स्किल्स की खास बात ये है कि इन्हें सीखते समय आपको मज़ा भी आता है और स्ट्रेस भी कम होता है।

ग्राफिक डिजाइन

Canva जैसे आसान टूल से कोई भी शुरुआत कर सकता है। पोस्टर, सोशल मीडिया पोस्ट, थंबनेल -ये सब बनाना सीख सकते हैं।

पहला क्लाइंट मिलना हमेशा खास होता है, चाहे 1500-2000 रुपये ही क्यों न हों। वो सिर्फ पैसे नहीं होते, वो आत्मविश्वास होता है।

वीडियो एडिटिंग

आज शॉर्ट वीडियो का दौर है। CapCut या Premiere Pro जैसे टूल्स से शुरुआत की जा सकती है। कई लोगों ने जॉब के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग सीखी और बाद में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। कुछ महीनों बाद स्पॉन्सरशिप्स और क्लाइंट प्रोजेक्ट्स भी मिलने लगे।

सबसे अच्छी बात? शुरुआत आप अपने फोन से भी कर सकते हैं।

फोटोग्राफी बेसिक्स

आज मोबाइल कैमरा इतना अच्छा है कि बेसिक फोटोग्राफी सीखकर आप स्टॉक फोटो प्लेटफॉर्म्स पर फोटो बेच सकते हैं। एक सेल्स जॉब करने वाले व्यक्ति ने इसी तरह शुरुआत की और धीरे-धीरे साइड इनकम बना ली।

लैंग्वेज और कम्युनिकेशन स्किल्स

फॉरेन लैंग्वेज

अंग्रेज़ी या जर्मन जैसी भाषा सीखना आज के समय में बहुत फायदेमंद है। Duolingo जैसे ऐप से रोज 20 मिनट भी काफी हैं। अच्छी इंग्लिश कम्युनिकेशन से इंटरनेशनल क्लाइंट्स या बेहतर जॉब अपॉर्च्युनिटी मिल सकती है।

पब्लिक स्पीकिंग

मीटिंग में बोलते समय घबराहट होना आम बात है। लेकिन यूट्यूब वीडियो, Toastmasters जैसे प्लेटफॉर्म या खुद की प्रैक्टिस से कॉन्फिडेंस बढ़ाया जा सकता है। धीरे-धीरे फर्क दिखने लगता है।

फाइनेंशियल स्किल्स

स्टॉक मार्केट बेसिक्स

अगर आप सैलरी से थोड़ा बचत कर पाते हैं, तो बेसिक इन्वेस्टमेंट सीखना जरूरी है। बिना समझे निवेश करने के बजाय पहले सीखिए। छोटे-छोटे अमाउंट से शुरुआत की जा सकती है।

फ्रीलांसिंग प्लेटफॉर्म्स

Upwork या Fiverr जैसे प्लेटफॉर्म्स पर प्रोफाइल बनाना भी एक स्किल है। सही प्रोफाइल, सही गिग और लगातार अप्लाई करने से धीरे-धीरे काम मिलने लगता है। कई लोग जॉब के साथ छोटे-छोटे प्रोजेक्ट लेकर शुरुआत करते हैं।

हेल्थ और वेलनेस स्किल्स

योगा या फिटनेस कोचिंग

पार्ट-टाइम में योगा या फिटनेस ट्रेनिंग का कोर्स करना सिर्फ कमाई के लिए नहीं, बल्कि खुद की हेल्थ के लिए भी अच्छा है। ऑफिस की थकान कम होती है और एनर्जी लेवल बेहतर रहता है।

कुकिंग स्पेशलाइजेशन

अगर आपको कुकिंग पसंद है, तो हेल्दी रेसिपीज या स्पेशल डिशेज में एक्सपर्ट बन सकते हैं। कुछ लोग वीकेंड पर होम-बेस्ड फूड ऑर्डर से शुरुआत करते हैं।

टाइम मैनेजमेंट: सबसे बड़ा गेम-चेंजर

सच कहें तो स्किल सीखना मुश्किल नहीं है, मुश्किल है समय निकालना। Pomodoro टेक्नीक (25 मिनट फोकस, 5 मिनट ब्रेक) काफी काम आती है। Todoist जैसे ऐप्स से प्लानिंग आसान हो जाती है।

छोटी-छोटी आदतें, जैसे रोज एक तय समय पर सीखना, धीरे-धीरे बड़ा रिजल्ट देती हैं।

चैलेंजेस और उन्हें कैसे संभालें

थकान, मोटिवेशन की कमी, या “कल से शुरू करूंगा” वाला माइंडसेट - ये सब आएंगे। लेकिन याद रखिए, शुरुआत परफेक्ट नहीं होनी चाहिए, बस लगातार होनी चाहिए।

निष्कर्ष: अब कदम उठाइए

पार्ट-टाइम में कोई नई स्किल सीखना सिर्फ अतिरिक्त कमाई का तरीका नहीं है, ये आत्मनिर्भर बनने का रास्ता है। आपको जॉब छोड़ने की जरूरत नहीं है, बस खुद को रोकने की जरूरत नहीं है।

शुरुआत छोटी रखिए - आज ही एक कोर्स देखिए, 30 मिनट निकालिए, और पहला कदम उठाइए।

क्योंकि बदलाव एक दिन में नहीं होता, लेकिन एक दिन से जरूर शुरू होता है।

FAQs

  1. पार्ट-टाइम में स्किल्स सीखने के लिए कितना टाइम दें? रोज 1-2 घंटे काफी है। वीकेंड्स पर ज्यादा।
  2. फ्री रिसोर्सेज कहां मिलेंगे? यूट्यूब, Coursera, Khan Academy - सब फ्री।
  3. जॉब के साथ बैलेंस कैसे रखें? शेड्यूल बनाएं, फैमिली सपोर्ट लें।
  4. कौन-सी स्किल सबसे ज्यादा पे करती है? डिजिटल मार्केटिंग और कोडिंग।
  5. शुरू करने में डर लगता है, क्या करें? छोटे गोल सेट करें, कम्युनिटी जॉइन करें।
  6. हिंदी में कोर्स मिलेंगे? हां, Unacademy और YouTube पर।

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