PM Vishwakarma Yojana Skill Training Guide: पूरी जानकारी हिंदी में

मेरे मोहल्ले में एक बढ़ई चाचा हैं, नाम है रामलाल जी। पिछले 25 साल से लकड़ी का काम कर रहे हैं, लेकिन पुराने औज़ारों से ही काम चला रहे थे। कुछ महीने पहले उन्होंने मुझसे पूछा, "बेटा, ये जो सरकार वाली विश्वकर्मा योजना है, उसमें ट्रेनिंग भी मिलती है क्या, या सिर्फ पैसा मिलता है?" उनकी बात सुनकर मुझे लगा कि बहुत से कारीगर भाई-बहनों को इस बारे में साफ जानकारी नहीं है -खासकर स्किल ट्रेनिंग वाले हिस्से के बारे में। तो आज इस पोस्ट में हम पूरी बात विस्तार से समझेंगे।

PM Vishwakarma Yojana Skill Training और कारीगरों के लिए प्रशिक्षण

PM Vishwakarma Yojana है क्या

यह योजना 17 सितंबर 2023 को केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी, और इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME मंत्रालय) चला रहा है। इसका मकसद है उन पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सहारा देना जो हाथ और औज़ार से काम करते हैं - जैसे बढ़ई, लोहार, दर्ज़ी, कुम्हार, राजमिस्त्री, मोची, सुनार, नाई वगैरह। कुल मिलाकर 18 पारंपरिक ट्रेड्स को इसमें शामिल किया गया है। इस योजना पर सरकार ने अगले पांच साल (2023-24 से 2027-28 तक) में करीब 13,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है।

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स्किल ट्रेनिंग वाला हिस्सा कैसे काम करता है

रामलाल चाचा जैसे कई लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही होता है, तो चलिए इसे step by step समझते हैं।

बेसिक ट्रेनिंग रजिस्ट्रेशन और स्किल असेसमेंट के बाद कारीगर को 5 से 7 दिन की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है, जो लगभग 40 घंटे की होती है। यह पूरी तरह मुफ्त होती है और इसमें अपने काम से जुड़े बुनियादी कौशल और नई तकनीकों की जानकारी दी जाती है।

एडवांस्ड ट्रेनिंग जो लोग अपने हुनर को और निखारना चाहते हैं, उनके लिए 15 दिन तक की एडवांस्ड ट्रेनिंग का विकल्प भी है। यह भी वैकल्पिक (optional) है, यानी अगर कोई सिर्फ बेसिक ट्रेनिंग तक ही रुकना चाहे, तो वो भी ठीक है।

ट्रेनिंग स्टाइपेंड यहां सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेनिंग के दौरान हर कारीगर को 500 रुपये प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिया जाता है, जो सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के ज़रिए बैंक खाते में आता है। मतलब ट्रेनिंग लेने के दौरान भी कमाई रुकती नहीं है।

टूलकिट इंसेंटिव बेसिक ट्रेनिंग पूरी होते ही कारीगर को 15,000 रुपये तक का एक डिजिटल e-voucher मिलता है, जिसे किसी नज़दीकी रजिस्टर्ड वेंडर के पास ले जाकर नए और आधुनिक औज़ार खरीदे जा सकते हैं।

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ट्रेनिंग के बाद लोन का फायदा भी मिलता है

ट्रेनिंग सिर्फ खानापूर्ति के लिए नहीं है, बल्कि यह अगले चरण का दरवाज़ा खोलती है। ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन पूरा होने के बाद कारीगर बिना किसी गारंटी (collateral-free) के लोन के लिए पात्र हो जाता है:

  • पहली किस्त में 1 लाख रुपये तक का लोन
  • सफलतापूर्वक चुकाने के बाद दूसरी किस्त में 2 लाख रुपये तक का लोन

यानी कुल मिलाकर 3 लाख रुपये तक, वो भी सिर्फ 5% ब्याज दर पर - जो बाज़ार के मुकाबले काफी कम है।

इस योजना के लिए पात्रता क्या है

  • आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए
  • वह असंगठित क्षेत्र में काम करने वाला स्वरोजगार कारीगर या शिल्पकार हो, और योजना में शामिल 18 पारंपरिक ट्रेड्स में से किसी एक से जुड़ा हो
  • एक परिवार से सिर्फ एक ही सदस्य इस योजना का लाभ ले सकता है
  • अगर पिछले 5 सालों में PMEGP, PM स्वनिधि या मुद्रा जैसी योजनाओं के तहत लोन लिया गया है, तो पात्रता प्रभावित हो सकती है
  • सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं

रजिस्ट्रेशन कैसे करें

रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त है और इसे नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के ज़रिए किया जाता है। साथ में ज़रूरी दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक और राशन कार्ड (अगर उपलब्ध हो) साथ ले जाना बेहतर रहता है। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद पोर्टल पर लॉगिन करके ट्रेनिंग शेड्यूल का स्टेटस चेक किया जा सकता है।

किन बातों का ध्यान रखें

अपने अनुभव और रिसर्च के आधार पर एक ज़रूरी सलाह - पोर्टल का स्टेटस या ट्रेनिंग डिटेल चेक करने के लिए हमेशा सिर्फ आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें। किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप या वेबसाइट को अपना आधार नंबर या मोबाइल नंबर देकर स्टेटस चेक करने से बचें, क्योंकि इनका सरकारी डेटा तक कोई सीधा एक्सेस नहीं होता और यह आपकी निजी जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ा सकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: क्या ट्रेनिंग के लिए कोई फीस देनी पड़ती है? नहीं, बेसिक और एडवांस्ड दोनों ट्रेनिंग पूरी तरह मुफ्त हैं, बल्कि उल्टा ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड भी मिलता है।

सवाल: क्या टूलकिट का पैसा सीधे बैंक खाते में आता है? नहीं, यह एक डिजिटल e-voucher के रूप में मिलता है जिसे रजिस्टर्ड वेंडर के पास जाकर टूल खरीदने में इस्तेमाल किया जाता है, सीधे नकद नहीं दिया जाता।

सवाल: अगर स्टाइपेंड बैंक खाते में नहीं आया तो क्या करें? सबसे पहले पोर्टल पर अपनी बैंक डिटेल सही तरीके से अपडेट है या नहीं, यह जांचें। अगर फिर भी 30 दिन से ज़्यादा देरी हो रही है, तो संबंधित हेल्पलाइन या CSC सेंटर से संपर्क करें।

सवाल: क्या PM स्वनिधि योजना का लाभ ले चुके लोग भी आवेदन कर सकते हैं? आमतौर पर नहीं, क्योंकि योजना के नियमों के अनुसार अगर पिछले 5 सालों में स्वनिधि, मुद्रा या PMEGP जैसी योजना से लोन लिया गया है, तो पात्रता प्रभावित हो सकती है। सटीक स्थिति जानने के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जांच करें।

रामलाल चाचा जैसे लाखों कारीगरों के लिए यह योजना सिर्फ पैसे की मदद नहीं, बल्कि अपने हुनर को नई पहचान देने का मौका है। अगर आप या आपके जानने वाले किसी पारंपरिक ट्रेड से जुड़े हैं, तो नज़दीकी CSC सेंटर पर जाकर एक बार पूरी जानकारी ज़रूर ले लें।

नोट:- इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। योजना से जुड़े नियम, पात्रता और लाभ समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले कृपया आधिकारिक पोर्टल pmvishwakarma.gov.in या नज़दीकी CSC केंद्र से नवीनतम जानकारी अवश्य जांच लें। लेखक या वेबसाइट किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या नुकसान के लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे।

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