ATS Friendly Resume कैसे बनाएं!
कुछ दिन पहले मेरे एक जानने वाले ने मुझसे पूछा - "मैंने 50 से ज्यादा जगह अप्लाई किया, अनुभव भी अच्छा है, फिर भी एक भी कॉल नहीं आया, आखिर गलती कहां हो रही है?" जब मैंने उसका रिज्यूमे देखा तो समस्या साफ थी - रिज्यूमे दिखने में भले ही सुंदर था, टेबल और कलरफुल डिज़ाइन से भरा हुआ, लेकिन यही चीज़ उसके खिलाफ जा रही थी। आजकल ज्यादातर कंपनियां रिज्यूमे को इंसान से पहले एक सॉफ्टवेयर को दिखाती हैं, और अगर वो सॉफ्टवेयर ही आपका रिज्यूमे ठीक से पढ़ नहीं पा रहा, तो रिक्रूटर तक पहुंचने का सवाल ही नहीं उठता। आज इसी पूरी समस्या को समझते हैं और एक ऐसा रिज्यूमे बनाना सीखते हैं जो इंसान और सॉफ्टवेयर, दोनों को पसंद आए।
पहले यह समझें कि ATS असल में करता क्या है
ATS यानी
Applicant Tracking System, एक सॉफ्टवेयर होता है जिसे कंपनियां इस्तेमाल करती हैं
ताकि हज़ारों रिज्यूमे में से मैन्युअली एक-एक करके छांटना न पड़े। जब आप किसी नौकरी
के लिए अप्लाई करते हैं, तो आपका रिज्यूमे सबसे पहले सीधे रिक्रूटर के पास नहीं जाता,
बल्कि इस सॉफ्टवेयर के पास जाता है। यह सॉफ्टवेयर आपके डॉक्यूमेंट को स्कैन करता है,
उसमें से जानकारी निकालता है (जैसे आपका नाम, अनुभव, स्किल्स) और फिर उसे जॉब डिस्क्रिप्शन
में मौजूद कीवर्ड्स से मिलाता है। अगर मिलान अच्छा हुआ तो रिज्यूमे आगे बढ़ता है, वरना
वह वहीं रुक जाता है, भले ही आप उस पद के लिए एकदम सही उम्मीदवार क्यों न हों।
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डिज़ाइन
में की गई गलतियां जो रिज्यूमे को रिजेक्ट करवा देती हैं
बहुत ज्यादा
डिज़ाइन वाला फॉर्मेट
कई लोग सोचते हैं कि रंग-बिरंगा और स्टाइलिश रिज्यूमे ज्यादा प्रभाव छोड़ेगा। हकीकत
में ATS सॉफ्टवेयर टेबल, कॉलम और ग्राफिक्स को सही तरीके से पढ़ नहीं पाता। कई बार
तो ऐसा भी होता है कि जानकारी उल्टी-सीधी क्रम में निकल आती है, जिससे सिस्टम को लगता
है कि रिज्यूमे अधूरा है।
हेडर-फुटर
में जरूरी जानकारी डालना
नाम, फोन नंबर या ईमेल को अक्सर लोग डिज़ाइन के चक्कर में हेडर सेक्शन में डाल देते
हैं। ज्यादातर ATS टूल्स हेडर-फुटर को स्कैन ही नहीं करते, यानी आपकी सबसे जरूरी जानकारी
सिस्टम तक पहुंचती ही नहीं।
अजीब फॉन्ट
का इस्तेमाल जितना
सामान्य फॉन्ट होगा, सिस्टम के लिए पढ़ना उतना आसान होगा। बहुत आर्टिस्टिक या हैंडराइटिंग
जैसे फॉन्ट सिस्टम को कन्फ्यूज़ कर देते हैं।
इमेज या
आइकॉन में जानकारी छिपाना
कुछ रिज्यूमे में स्किल्स को बार-ग्राफ या आइकॉन के रूप में दिखाया जाता है, जो देखने
में अच्छा लगता है लेकिन सॉफ्टवेयर उसे टेक्स्ट के रूप में पढ़ ही नहीं पाता।
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ATS
Friendly रिज्यूमे बनाने का सही तरीका
सिंगल
कॉलम फॉर्मेट चुनें
पूरा रिज्यूमे एक ही सीधी कॉलम में लिखें, ऊपर से नीचे। इससे सिस्टम जानकारी को सही
क्रम में पढ़ पाता है।
स्टैंडर्ड
सेक्शन हेडिंग रखें
"Work Experience", "Education", "Skills" जैसे सामान्य
और सीधे हेडिंग इस्तेमाल करें। क्रिएटिव नाम जैसे "मेरा सफर" या "जो
मैंने सीखा" सिस्टम को सेक्शन पहचानने में दिक्कत देते हैं।
जॉब डिस्क्रिप्शन
के मुताबिक कीवर्ड डालें
जिस पद के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उसकी जॉब पोस्टिंग को ध्यान से पढ़ें और उसमें बार-बार
आने वाले शब्दों (जैसे टूल का नाम, स्किल, टेक्नोलॉजी) को अपने रिज्यूमे में नेचुरल
तरीके से शामिल करें। ध्यान रहे, हर शब्द को जबरदस्ती ठूंसना नहीं है, बल्कि जो सच
में आपका अनुभव है वही लिखना है।
फाइल फॉर्मेट
का ध्यान रखें ज्यादातर
कंपनियां .docx या साधारण PDF फॉर्मेट पसंद करती हैं। स्कैन की हुई फोटो या डिज़ाइन
टूल से एक्सपोर्ट की गई इमेज-बेस्ड PDF से बचें, क्योंकि उसमें टेक्स्ट सिस्टम पढ़
ही नहीं सकता।
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फाइल का
नाम प्रोफेशनल रखें
"Resume_final2_use_this_one.pdf" जैसे नाम से बचें। इसकी जगह अपना नाम और
पद डालकर सीधा नाम रखें, जैसे "Aman_Verma_Digital_Marketing.pdf"।
करियर
ऑब्जेक्टिव की जगह छोटा सा समरी सेक्शन लिखें पुराने ज़माने वाला "To secure a challenging
position..." वाला ऑब्जेक्टिव अब असरदार नहीं रहा। इसकी जगह 2-3 लाइनों में अपने
अनुभव और मुख्य स्किल्स का सार दें, जिसमें जरूरी कीवर्ड भी नेचुरली आ जाएं।
भारतीय
जॉब मार्केट के लिए कुछ खास बातें
भारत में
Naukri, LinkedIn और सरकारी नौकरी पोर्टल्स पर भी ATS जैसे सिस्टम काम करते हैं। इसलिए
CTC (Current और Expected दोनों) और Notice Period जैसी जानकारी को स्पष्ट और सही जगह
पर लिखना जरूरी है, क्योंकि कई पोर्टल इन फील्ड्स को अलग से पहचानते और दिखाते हैं।
साथ ही, एक ही रिज्यूमे हर जगह भेजने की बजाय, हर अप्लिकेशन से पहले उसमें उस पद से
जुड़े 2-3 कीवर्ड जोड़ना असर दिखाता है।
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एक बार
बनाने के बाद क्या चेक करें
रिज्यूमे
बनाने के बाद उसे किसी टेक्स्ट एडिटर में कॉपी-पेस्ट करके देखें कि सारी जानकारी सही
क्रम में और साफ दिख रही है या नहीं। अगर पेस्ट करने पर टेक्स्ट बिखरा हुआ या उल्टा-पुल्टा
दिखे, तो समझ जाइए कि फॉर्मेट में सुधार की जरूरत है। इसके अलावा किसी दोस्त या सीनियर
से भी एक बार पढ़वा लें, क्योंकि इंसान की नज़र वो गलतियां पकड़ लेती है जो सिस्टम
चेक नहीं कर सकता।
और अंत में
ATS friendly रिज्यूमे बनाने का मतलब सिर्फ सिस्टम को खुश करना नहीं है, बल्कि अपनी
काबिलियत को सही तरीके से सामने रखना है। डिज़ाइन जितना सिंपल होगा, आपकी असली मेहनत
और अनुभव उतनी ही साफ तरीके से नज़र आएगा। एक बार सही फॉर्मेट सेट कर लेने के बाद बस
हर अप्लिकेशन के हिसाब से थोड़ा-बहुत बदलाव करते रहना ही काफी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य
जागरूकता और मार्गदर्शन के उद्देश्य से साझा की गई है। अलग-अलग कंपनियां और पोर्टल
अपने-अपने ATS सिस्टम में अलग तरीके अपना सकते हैं, इसलिए अंतिम रिज्यूमे बनाने से
पहले संबंधित कंपनी या जॉब पोर्टल की गाइडलाइन जरूर देख लें। यह लेख किसी भी नौकरी
की गारंटी नहीं देता, यह केवल रिज्यूमे को बेहतर बनाने में मदद के लिए है।
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